एसएमयूपीन्यूज, लखनऊ।उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को लेकर गिरफ्तार किए गए जमालुद्दीन उर्फ छांगुर के मामले में एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। बलरामपुर जिले के उतरौला तहसील क्षेत्र स्थित मधपुर गांव में छांगुर की आलीशान कोठी को अवैध बताते हुए प्रशासन ने उस पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। तहसीलदार एसपी प्रजापति ने सोमवार को बेदखली के दो नोटिस जारी किए हैं। यह नोटिस क्रमश: 17 मई और 26 मई को चस्पा किए गए थे। कोठी जिस जमीन पर बनी है, वह बंजर भूमि है और आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत नहीं है।

धर्म परिवर्तन के मामले में सिख और सिंधी समाज का भी आक्रोश फूट पड़ा

प्रशासन की ओर से चेतावनी दी गई है कि सात दिन के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो कोठी को ध्वस्त कर दिया जाएगा। सोमवार शाम पुलिस बल के साथ प्रशासनिक टीम मधपुर पहुंची और छांगुर की कोठी पर नोटिस चस्पा किया। इस कार्रवाई के विरोध में छांगुर की बहू साबिरा ने पुलिस पर बच्चों को डराने का आरोप लगाया, जिसे पुलिस ने मनगढ़ंत करार दिया।धर्म परिवर्तन के मामले में सिख और सिंधी समाज का भी आक्रोश फूट पड़ा है। इन समुदायों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से साजिश रचने वालों को फांसी देने की मांग की है। एटीएस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। छांगुर की सहयोगी नीतू रोहरा और उसके पति नवीन रोहरा ने 19 बार यूएई की यात्रा की थी, जबकि दुबई में उनका धर्म परिवर्तन प्रमाणित भी हुआ था।

छांगुर का बेटा महबूब और नीतू का पति नवीन रोहरा गिरफ्तार हो चुके थे

हालांकि उनके पासपोर्ट रिकॉर्ड से दुबई यात्रा की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि फर्जी पासपोर्ट या अलग नामों से यात्राएं की गई हैं। एटीएस को संदेह है कि यह गिरोह खाड़ी देशों के आतंकी संगठनों के इशारे पर धर्मांतरण का रैकेट चला रहा था, जिसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में फैला है।लंबे समय से फरार चल रहे छांगुर को शनिवार को लखनऊ के गोमतीनगर से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके साथ महाराष्ट्र की रहने वाली नीतू उर्फ नसरीन भी पकड़ी गई। इससे पहले आठ अप्रैल को छांगुर का बेटा महबूब और नीतू का पति नवीन रोहरा गिरफ्तार हो चुके थे।

छांगुर लखनऊ के एक पूर्व न्यायाधीश के घर में छिपा था

जानकारी के अनुसार, बेटे की गिरफ्तारी के बाद छांगुर लखनऊ के एक पूर्व न्यायाधीश के घर में छिपा था। एफआईआर को खारिज कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसे 24 अप्रैल को खारिज कर दिया गया। छांगुर के खिलाफ सितंबर 2024 में 10 लोगों के साथ एफआईआर दर्ज की गई थी। अंगूठी बेचने वाला यह व्यक्ति कुछ वर्षों में ही पीर बनकर करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन गया था।एटीएस की जांच में सामने आया कि छांगुर ने तहसील कर्मियों से साठगांठ कर तालाब को अपने नाम करवा लिया था और पुणे में 16 करोड़ रुपये की जमीन खरीदकर उसमें न्यायालय के लिपिक की पत्नी संगीता को साझेदार बनाया। यह भी सामने आया है कि जो लोग धर्मांतरण में सहयोग नहीं करते थे, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाती थी।

गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि छांगुर का 18 सदस्यीय गैंग था

गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि छांगुर का 18 सदस्यीय गैंग था, जिनमें से अभी तक सिर्फ चार गिरफ्तार हुए हैं। बाकी 14 की तलाश जारी है। यह नेटवर्क गोंडा, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, औरैया व पुणे तक फैला है। एटीएस को ठोस प्रमाण मिले हैं कि यह गिरोह सुनियोजित ढंग से देश की एकता को तोड़ने की साजिश रच रहा था। अब जब कि गिरफ्तारी हो चुकी है, छांगुर की कोठी पर प्रशासन की कार्रवाई और तेज हो गई है, जबकि पूरे क्षेत्र में खामोशी और दहशत का माहौल है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *