एसएमयूपीन्यूज,ब्यूरो। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा लोकसभा में कल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बारे में की गई टिप्पणी को लेकर आज राज्यसभा में विपक्ष के सदस्यों ने हंगामा किया और सदन से वॉक आउट किया। आज सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभापति के समक्ष अनुराग ठाकुर के आरोपों पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मेरे 60 साल के संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन में इस तरह के झूठे और आधारहीन आरोप जो लोकसभा में अनुराग ठाकुर ने लगाए, वह अवमाननापूर्ण है।
अनुराग ठाकुर के आरोपों की निंदा करता हूं
जब मेरे सहयोगियों ने उन्हें चुनौती दी, तो उन्हें अपनी अपमानजनक टिप्पणी वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन नुकसान तो हो चुका है, क्योंकि मीडिया और सोशल मीडिया ने उस बेबुनियाद आरोपों वाले बयान को प्रसारित कर दिया। खरगे ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता विपक्ष के नाते मैं अनुराग ठाकुर के आरोपों की निंदा करता हूं। अगर अनुराग ठाकुर आरोपों को साबित करने में विफल साबित होते हैं तो उन्हें संसद में बने रहने का अधिकार नहीं है। तब उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर वो अपने आरोपों को साबित कर देते हैं तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। मैं उससे जुड़े दस्तावेज यहां टेबल कर रहा हूं।
हंगामे के कारण वह अपनी बात पूरी नहीं कर सके रिजिजू
खरगे ने कहा कि एचडी देवेगौड़ा यहां सदन में बैठे हैं, वो अच्छी तरह जानते हैं, मुझे कभी कोई विधानसभा सदन में इस तरह नहीं बोला। अगर कभी कोई बोला तो सीएम ने बगल में आकर माफी मांगी। मैं कभी झूठ नहीं बोला और न ही कोई गलत काम किया। इस पर भाजपा के सदस्यों ने प्रतिवाद किया तो सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ओर से शोरशराबा और हंगामा शुरू हो गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू कुछ बोलने के लिए खड़े हुए लेकिन हंगामे के कारण वह अपनी बात पूरी नहीं कर सके।
सभापति ने सदन में शून्यकाल की कार्यवाही शुरू कर दी
हंगामे के बीच खरगे ने सभापति से सरंक्षण की अपील की कि अनुराग ठाकुर के आरोपों को लेकर यहां जो कुछ हुआ, नेता सदन को उसके लिए माफी मांगनी चाहिए। इस बीच सभापति ने सदन में शून्यकाल की कार्यवाही शुरू कर दी। इसके विरोध में कांग्रेस व उनके अन्य सहयोगी विपक्षी दलों के सदस्य सदन से वॉक आउट कर गये। इस मामले में सभापति ने कहा यदि हम इस मुद्दे की गंभीरता से जांच करें, तो यह कुछ स्थितियों पर निर्भर करता है।
कोई आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती
एक मुद्दा यह है कि एक संसद सदस्य सदन का सदस्य होने के महान विशेषाधिकार का उपयोग करता है, जो संवैधानिक संरक्षण है क्योंकि सदन में किसी सदस्य द्वारा कही गई किसी भी बात पर कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की जा सकती है और कोई आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती है।
जब कोई सदस्य सदन में बोलता है, तो उसे छूट दी जाती है। मैंने कई मौकों पर यह कहा है कि हम दशकों और आधी सदी से अर्जित प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचा सकते। राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने घनश्याम तिवाड़ी की अध्यक्षता वाली संसदीय आचार समिति (एथिक्स कमेटी) को ऐसा प्रभावी तंत्र विकसित करने का जिम्मा सौंपा है, जिससे सदन में सदस्य मर्यादित आचरण करें और संसदीय संस्थान की साख में इजाफा हो।