नई दिल्ली। न्यायपालिका में लोगों का विश्वास मज़बूत करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब सभी जजों की संपत्ति का ब्यौरा सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक होगा। एक अप्रैल को हुई फुल कोर्ट बैठक में सभी जजों ने यह फैसला लिया है।

जजों की बैठक में लिया गया अहम फैसला

बैठक में यह फैसला लिया गया है कि जजों को पदभार ग्रहण करने पर या जब भी उनकी संपत्ति में कोई महत्वपूर्ण चीज़ जुड़ती है, तो वो अपनी संपत्ति का ब्यौरा चीफ जस्टिस को देंगे। ख़ुद चीफ जस्टिस भी ऐसा करेंगे। इसके बाद इन संपत्ति के ब्यौरे की जानकारी सम्बंधित जज की सहमति से सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। अब तक चीफ जस्टिस समेत 30 जजों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सौंप दिया है।

इन जजों ने घोषित कर दी अपनी संपत्ति

अब तक 1997 के एक प्रस्ताव के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को अपनी संपत्ति की घोषणा मुख्य न्यायाधीश के समक्ष करनी होती थी। 2009 के एक निर्णय में न्यायालय की वेबसाइट पर संपत्ति घोषणा के स्वैच्छिक प्रकाशन की अनुमति दी गई थी, लेकिन सभी न्यायाधीशों ने ऐसा करने का विकल्प नहीं चुना। अब सुप्रीम कोर्ट के जजों ने सामूहिक रूप से संपत्ति के खुलासे को सार्वजनिक करने पर सहमति जताई। जिन न्यायाधीशों ने अपनी संपत्ति की घोषणा कर दी है, उनमें मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई, न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा

घोषणाओं का पूरा सेट सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम जस्टिस यशवंत वर्मा मामले के बाद उठाया है। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना के बाद कथित तौर पर नकदी की जली हुई गड्डियां मिली थीं। विवाद के बाद उनका तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कर दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उनका तबादला नकदी मिलने के विवाद से संबंधित नहीं था।अब तक चीफ जस्टिस समेत 30 जजों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सौंप दिया है।

दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध जारी रहेगा

दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूरी तरह से लगाए प्रतिबंध को सही ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर के राज्यों को निर्देश दिया कि राज्य सरकारें पटाखों पर रोक को लागू करने के लिए प्रभावी कदम उठाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक ये साबित नहीं हो जाता कि ग्रीन पटाखों से न के बराबर प्रदूषण होता है, तब तक बैन के पुराने आदेश में बदलाव का कोई औचित्य नजर नहीं आता।कोर्ट में सेंट्रल पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड, एनईईआरआई (नीरी), सीएसआईआर की ओर से पेश रिपोर्ट में कहा गया था कि बाकी पटाखों के मुकाबले ग्रीन पटाखों से 30 फीसदी कम प्रदूषण होता है। इस रिपोर्ट के मद्देनजर पटाखा निर्माता कंपनियों ने छूट की मांग थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक ये साबित नहीं हो जाता कि ग्रीन पटाखों से ना के बराबर प्रदूषण होता है, तब तक बैन के पुराने आदेश में बदलाव का कोई औचित्य नजर नहीं आता।

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