संजीव सिंह, बलिया। यूपी के बलिया जनपद में फर्जी कागजात के आधार पर स्वास्थ्य विभाग में नौकरी हथियाने का बड़ा मामला प्रकाश में आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ ने 15 स्टाफ नर्सो के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। यह सब सीएमओ की तेजी के चलते यह सब संभव हो पाया है।

स्वास्थ्य महानिदेशक से फर्जी पोस्टिंग लेटर जारी करवा लिया

बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य महानिदेशक से फर्जी पोस्टिंग लेटर जारी करवा लिया है। सभी आरोपी अलग-अलग अस्पतालों में स्टाफ नर्सो के पद पर तैनात हैं। फर्जी कागजात के आधार पर नियुक्ति में सीएमओ कार्यालय से लेकर स्वास्थ्य महानिदेशालय तक के अधिकारियों व कर्मचारियों के मिली भगत की आशंका है। हालांकि मामला प्रकाश में आने के बाद महानिदेशक ने नियुक्ति से जुड़ी रिपोर्ट भी तलब कर ली है।

ओआरएस घोल की उपयोगिता के बारे सीएम ने पूछा तो खुला राज

बलिया के सीएमओ डॉ़ विजयपति द्विवेदी ने बताया कि सीएचसी पर शिविर लगा हुआ था। इस दौरान वहां पर तैनात स्टाफ नर्स से हीटवेव के दौरान ओआरएस घोल की उपयोगिता के बारे में पूछने तो सहीं जवाब नहीं दे सकीं। ओआरएस खाया जाता है कि पिलाया जाता है इसके बारे में उन्हें पता तक नहीं था।

इसके बाद शक होने पर उन्होंने सभी 15 नई नर्सिंग आफीसर के दस्तावेज का दोबारा सत्यापन करवाना शुरू किया तो सब फरार हो गए।अचानक गैर हाजिर रहने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी करने पर इनमें से किसी ने जवाब भी नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने महानिदेशालय को इस संबंध में पत्र भेजने के साथ ही एफआईआर भी दर्ज करवा दी। डिप्टी सीएमओ डा. पदवती ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। इसमें और भी हो सकती है।

फर्जी अभिलेखों के आधार पर अब तक लाखों रुपये ले चुके हैं वेतन

सीएमओ के अनुसार, नवम्बर 2023 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से स्वस्थ्य विभाग में नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया। इच्छुक अभ्यार्थियों ने आवेदन किया। जरूरी औपचारिकता पूरी करने के साथ ही उनके अभिलेखों की जांच की गयी। इसके बाद पात्र मिलने पर नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया।

नर्सिंग आफीसर के पद पर नौकरी मिलने के बावजूद कुछ दिनों तक वे भटकते रहे।इसके बाद तत्कालीन सीएमओ ने उनकी पोस्टिंग के लिए महानिदेशालय कार्यालय को पत्र लिखा। उनके लेटर के आधार पर अलग-अलग अस्पतालों में उनकी तैनाती कर दी गयी। सूत्रों की मानें तो नौकरी मिलने के बाद सभी को हर माह 60 से 70 हजार रुपये बतौर वेतन जारी होने लगा। कुल मिलाकर फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी करने वाले अब तक लाखों रुपये वेतन भी ले चुके हैं।

सीएमओ कार्यालय द्वारा फर्जी पोस्टिंग का नहीं करवाया गया सत्यापन

फर्जी पोस्टिंग लेटर पर महानिदेशक और नर्सिंग अनुभाग के जॉइंट डायरेक्टर के दस्तखत भी थे। यह पत्र हूबहू उसी तरह थे, जैसे महानिदेशालय से सीएमओ को भेजे जाते हैं।आशंका जताई जा रही है कि बलिया सीएमओ कार्यालय से यह दस्तावेज दोबारा महानिदेशालय भेजकर उनका सत्यापन करवाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। हालांकि नए सीएमओ डॉ़ विजयपति द्विवेदी ने आशंका होने पर जांच शुरू करवाई तो एक एक करके फर्जीवाड़े की परतें खुलती गईं।

उन्होंने इन सभी के दस्तावेज दोबारा महानिदेशालय भेजने के साथ ही आरोपितों को भी नोटिस जारी कर अपने मूल दस्तावेज सीएमओ कार्यालय लाकर सत्यापन करवाने को कहा। वहीं सूत्रों की माने तो इस पूरे खेल में तत्कालीन सीएमओ और स्थापना लिपिक के कर्मचारी शामिल है। अब मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद सही जांच हुई तो इसमें कईयों पर गाज गिरनी तय है।

इस मामले में क्या बोले – चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशक

चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशक उत्तर प्रदेश सेवाएं रतनपाल सिंह सुमन ने बताया कि यह पुराना प्रकरण है। फर्जी ज्वाइन लेटर जालसाजी से डाउनलोड कर लिया गया है। इसके लिए जांच कमेटी गठित की गई है। जांच कमेटी की जो रिपोर्ट आएगी उसी के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

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