महाकुम्भनगर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार सुबह महाकुम्भ में त्रिवेणी संगम में स्नान कर पूजा अर्चना की। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शनिवार देर रात महाकुम्भ मेला क्षेत्र में सेक्टर 7 स्थित राजस्थान पवेलियन पहुंचे। सुबह बोट से त्रिवेणी संगम का अवलोकन किया। उन्होंने त्रिवेणी संगम घाट पर पावन डुबकी लगाने के बाद मां गंगे की पूजा अर्चना, भगवान महादेव का दूध एवं गंगा जल से अभिषेक भी किया।
मुख्यमंत्री ने राजस्थान के विभिन्न जनपदों से आए श्रद्धालुओं से भी भेंट की

मुख्यमंत्री ने मां गंगे की आरती की और बड़े हनुमान जी के दर्शन भी किए। उन्होंने महाकुम्भ के महाआयोजन को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और उन्हें इस आयोजन के कुशल संचालन के लिए बधाई दी। इससे पहले, मुख्यमंत्री शर्मा का शनिवार देर रात प्रयागराज एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश के मंत्री नंद गोपाल नंदी ने स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने महाकुम्भ में बने राजस्थान मंडप का अवलोकन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राजस्थान के विभिन्न जनपदों से आए श्रद्धालुओं से भी भेंट की।
कुंभ की वैश्विक लोकप्रियता हर भारतीय के लिए गर्व की बात : पीएम
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को वर्ष की पहली मन की बात की। इसमें उन्होंने त्रिवेणी तट पर लगे महाकुंभ की चर्चा प्रमुखता से की। बोले, महाकुंभ का श्रीगणेश हो चुका है। चिरस्मरणीय जन सैलाब अकल्पनीय दृश्य और समता समरसता का असाधारण संगम दिखाई दे रहा है। इस बार कुंभ में कई दिव्य योग बन रहे हैं। ये उत्सव विविधता में एकता का है। संगम की रेती पर पूरे भारत के ही नहीं विश्व के लोग जुटते हैं। हजारों वर्षों से चली आ रही परंपरा में कहीं कोई भेदभाव नहीं, जातिवाद नहीं।
वैश्विक लोकप्रियता हर भारतीय के लिए गर्व की बात
उन्होंने खुशी और संतोष जताया कि महाकुंभ में युवाओं की बड़ी भागीदारी दिख रही है। जब युवा पीढ़ी अपनी सभ्यता के साथ, गर्व के साथ जुड़ जाती है तो उसकी जड़ें और मजबूत होती हैं। तब उसका स्वर्णिम भविष्य भी सुनिश्चित हो जाता है। इस बार कुंभ के डिजिटल फुट प्रिंट भी इतने बड़े पैमाने पर दिख रहे हैं। कुंभ की ये वैश्विक लोकप्रियता हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। देश की सांस्कृतिक विरासत का भान कराते हुए कहा, महाकुंभ में भारत के दक्षिण से लोग आते हैं। भारत के पूर्व और पश्चिम से आते हैं। कुंभ में गरीब, अमरी सब एक हो जाते हैं। सब लोग संगम में डुबकी लगाते हैं। एक साथ भंडारों में भोजन करते हैं। प्रसाद लेते हैं, तभी तो कुंभ एकता का कुंभ है। यह आयोजन हमें ये भी बताता है कि कैसे हमारी परंपराएं पूरे भारत को एक सूत्र में बांधती हैं।
गंगासागर में मेले का भी विहंगम आयोजन हुआ

उत्तर से दक्षिण तक मान्यताओं को मानने के तरीके एक जैसे ही हैं। एक तरफ प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में कुंभ का आयोजन होता है, वैसे ही दक्षिण में गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा और कावेरी नदी के तटों पर पुष्करम होते हैं। कुछ दिन पहले ही पश्चिम बंगाल में गंगासागर में मेले का भी विहंगम आयोजन हुआ। संक्रांति के पावन अवसर पर इस मेले में पूरी दुनिया से आए लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई है। कुंभ, पुष्करम और गंगा सागर मेला ये पर्व हमारे सामाजिक मेल जोल को सद्भाव को, एकता को बढ़ाने वाले पर्व हैं।