एसएमयूपीन्यूज,ब्यूरो। वन नेशन वन इलेक्शन पर आम सहमति के लिए सरकार ने ज्वॉइंट पार्लियामेंट कमेटी (जेपीसी) के सदस्यों का ऐलान कर दिया है। लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सांसदों को इस JPC के लिए चुना गया है।राजस्थान के पाली से बीजेपी के सांसद पीपी चौधरी जेपीसी की अध्यक्षता करेंगे।

लोकसभा ने अपने 21 नामों की घोषणा भी कर दी है। इन 21 में से 5 सांसदों का पेशा वकालत है। जेपीसी में बीजेपी के 10, कांग्रेस के 3 और टीएमसी, डीएमके, शिवसेना (शिंदे), एनसीपी (शरद), रालोद, टीडीपी, जनसेना, सपा के एक-एक सांसदों को जगह दी गई है।

कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी, मनीष तिवारी शामिल

कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी वाड्रा, मनीष तिवारी और सुखदेव भगत सिंह को शामिल किया गया है। भाजपा की तरफ से बांसुरी स्वराज, संबित पात्रा और अनुराग सिंह ठाकुर समेत 10 सांसद हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से कल्याण बनर्जी का नाम है। इसके अलावा सपा, डीएमके, टीडीपी समेत 8 अन्य पार्टियों से एक-एक सांसद इस जेपीसी का सदस्य बनाया गया है।

मंगलवार को संसद में पेश किया गया था यह बिल

बता दें कि संसद में मंगलवार को पेश हुए 129 वें संविधान (संशोधन) बिल यानी एक देश एक चुनाव बिल की समीक्षा के लिए सरकार ने बनने ज्वॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी नाई है। इस समिति को अगले सत्र के आखिरी हफ्ते के पहले दिन तक अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी। फिलहाल सिर्फ लोकसभा से जेपीसी में शामिल किए गए सांसदों के नामों का ऐलान किया गया है। राज्यसभा की तरफ से इस जेपीसी के लिए 10 सांसदों के नामों की घोषणा जल्द की जाएगी।

समीक्षा के बाद जेसीपी कमेटी सौंपेगी अपना रिपोर्ट

यह संसद की संयुक्त संसदीय कमेटी है, जिसमें बिल और मुद्दों की समीक्षा की जाती है। समीक्षा के बाद जेपीसी कमेटी अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपताी है। वन नेशन-वन इलेक्शन बिल को इसी कमेटी में भेजा गया है। वन नेशन-वन इलेक्शन का विधेयक संवैधानिक संशोधन से जुड़ा है। इस विधेयक के संसद से पास होने के बाद पूरे देश में चुनाव आयोग की सिफारिश पर विधानसभा और लोकसभा को भंग किया जा सकता है। विधेयक लागू होने के बाद देश में विधानसभा और लोकसभा का चुनाव एक साथ कराया जा सकता है।

बिल पेश करने के पक्ष में 269 और विपक्ष में 198 वोट पड़े

कानून मंत्री मेघवाल ने 17 दिसंबर को लोकसभा में एक देश-एक चुनाव को लेकर संविधान संशोधन बिल रखा था। विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया। इसके बाद बिल पेश करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग कराई गई। कुछ सांसदों की आपत्ति के बाद वोट संशोधित करने के लिए पर्ची से दोबारा मतदान हुआ। इस वोटिंग में बिल पेश करने के पक्ष में 269 और विपक्ष में 198 वोट पड़े। इसके बाद कानून मंत्री ने बिल दोबारा सदन में रखा।

लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आज लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच एक देश-एक चुनाव से जुड़ा 129 वां संविधान संशोधन विधेयक संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित कर दी गई।लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11:00 बजे शुरू होते ही विपक्ष ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के मुद्दे पर शोर-शराबा शुरू कर दिया। विपक्षी सदस्य सदन के बीचों बीच पहुंच गए।

सदन के नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उपस्थित थे

इस दौरान सदन के नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी उपस्थित थे। विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच केंद्रीय कानूनमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान संशोधन विधेयक को संसद की संयुक्त कार्य समिति को भेजने का प्रस्ताव रखा। हंगामे के बीच प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर सदन की अनुमति प्रदान की गई। जेपीसी में 27 सदस्य हैं। इनमें से 12 राज्यसभा से हैं।

संसद परिसर धरना या प्रदर्शन के लिए नहीं

लोकसभा अध्यक्ष ने इस दौरान सदस्यों को संसदीय परंपराओं और गरिमा का सम्मान करने का आग्रह किया। उन्होंने सदस्यों को चेताया कि संसद परिसर धरना या प्रदर्शन के लिए नहीं है। ऐसा करने पर कार्यवाही भी की जा सकती है। इसके बाद वंदेमातरम के साथ ही कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

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